Friday, August 26, 2011
अन्ना को क्यों चुनौती दे रही हैं मायावती
उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री सुश्री मायावती ने आज जनलोकपाल बिल पर अपना मौन तोड़ा तो सीधे अन्ना हजारे और उनकी सिविल सासाइटी को ही चुनौती दे दी। उन्होने कह दिया कि यदि टीम अन्ना अपने ही जनलोकपाल पर अड़े रहना चाहते हैं तो उन्हें सन् 2014 के आम चुनाव का इंतजार कर लेना चाहिए। टीम अन्ना यह चुनाव लड़कर अपनी सरकार बना ले और बिल पास करा ले। ये है मायावती का बड़बोलापन, वे आजकल आपे में नहीं हैं क्योंकि भ्रष्टाचार के जितने मामले उत्ततर प्रदेश में उजागर हो रहे हैं उतने शायद ही कहीं और सामने आये हों। इस राज्य में तीन-तीन सीएणओ भ्रष्टाचार की बलिवेदी पर ही चढ़ गए। सीबीआई हत्याओं और भ्रष्टाचार की जांच कर रही है। मायावती को यह भी एतराज है कि जनलोकपाल बिल के लिए बनने वाली कमेटी में एक भी दलित और अल्पसंख्यक नहीं है। उन्होने धमकाया है कि यदि जनलोकपाल के लिए बनी कमेटी में दलित और अल्पसंख्यकों को नहीं रखा गया तो संसद में इस बिल का बसपा विरोध करेगी। वे अपने राज्य में किये गए कामों को भी टीम अन्ना की मांगे के परिप्रेक्ष्य में गिना रही हैं। किन्तु वे यह भूल गई हैं कि अन्ना का आन्दोलन न तो दलित सवर्ण और न ही हिन्दु मुसलमान के बीच बंटा है। यह जन आन्दोलन बन चुका है। वे यह भी ध्यान रखें कि 2014 का चुनाव अन्ना लड़े या न लडें किन्तु उनकी मांगों की उपेक्षा हुई तो हालात वही होंगे जो 1977 में हुए थे। जीते कोई लेकिन हारेंगे अन्ना का उपहास उडाने वाले।
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